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Wednesday, September 16, 2020

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ ( part 1 )

 


भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ : - ( PART 1 )

1. मौर्य साम्राज्य ( ई .पूर्व 323 से 185  ई.पूर्व तक )  कोटिल्य  के अर्थशास्त्र विशाखादत्त के मुद्राराक्षस , दीपवंश , महावंश , अशोक के अभिलेख आदि के मौर्य साम्राज्य के विषय में जानकारी मिलती है !


2. चन्द्र गुप्त मौर्य  ( ई .पूर्व 322 से 298  ई.पूर्व तक ) चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्द वंश के अंतिम शशक घनानंद को पराजीत कर 322 ई . पूर्व में मौर्या साम्राज्य की स्थापना की 

चन्द्र गुप्त ने पंजाब और सिंध पर अधिकार कर  लिया 

उसने ननद वंश का उन्मूलन किया और सेल्युकश को पराजीत किया

उसने दक्षिणी भारत के अधिकांश भाग  पर भी अधिकार कर लिया चंद्रगुप्त मौर्य एक योग्य शासक था


3. बिंदुसार  ( ई .पूर्व 298 से 272  ई.पूर्व तक )  चंद्रगुप्त  मौर्य का पुत्र बिंदुसार 298 ई. पूर्व में गद्दी पर बैठा उसने अपने पिता द्वारा जीते हुए क्षेत्रों को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा


4.  अशोक  ( ई .पूर्व 273 से 232  ई.पूर्व तक )  अशोक का विधिवत राज्य अभिषेक 269 ई. पूर्व में हुआ अशोक ने कश्मीर पर विजय प्राप्त की

 उसने कलिंग पर विजय प्राप्त की   उसने लोक कल्याण को राज्य का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया

 उसने संपूर्ण विश्व को धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाया


5. अशोक का  धम्म  अशोक के धम के प्रमुख सिद्धांत थे  ---------

1.  सहिष्णुता

2.  अहिंसा

3. आडंबरहीनता

4. लोक कल्याण

5. श्रेष्ठ पवित्र नैतिकता पर बल देना

 अशोक ने दम के अंतर्गत पाप ही नेता गुरुजनों तथा माता-पिता की सेवा, पापों से दूर रहने, सभी धर्मों का आदर करने अहिंसा का पालन करने आत्मनिरीक्षण पर बल दिया

 

6. अशोक के धम्म  का स्वरूप -   फ्लीट  के अनुसार ये राज धर्म था तथा डॉ. राधा कुमुद मुखर्जी का अनुसार यह सार्वभौम धर्म था भंडारकर के अनुसार यह उपासक बौद्ध  धर्म था


7. मौर्य प्रशासन -----

 केंद्रीय प्रशासन - 

1. राजा

2. मंत्री परिषद

3. अधिकारी

4. नगर प्रबंध

5. सेना

6. गुप्तचर व्यवस्था

7. न्याय व्यवस्था

8.  राजस्व शासन

9. लोक कल्याण के कार्य

10. प्रांतीय शासन

11. जनपद में ग्रामीण शासन


8.  अशोक के प्रशासनिक सुधार ----

1. राजूंक,  युक्त एवं  प्रादेशिक आदि अधिकारियों की नियुक्ति करना

2. धर्म महामात्रों नियुक्ति

3. दंड विधान को उदार बनाना

4. प्राणी मात्र की भलाई के लिए सड़कों, कुओं, चिकित्सालयों का निर्माण करवाना

5. अहिंसा के पालन पर बल देना

6 ब्रिज भूमि को महामात्र नगर व्यवहारिक आदि की नियुक्ति करना, विदेश नीति को समसामयिक बनाना


9. गुप्त साम्राज्य की स्थापना गुप्त साम्राज्य का उदय तीसरी शताब्दी के अंत में हुआ था


10. श्री गुप्त -  श्री गुप्त ने गुप्त साम्राज्य की स्थापना की

11.  घटोत्कच -  घटोत्कच  श्री गुप्त का उत्तराधिकारी था उसका राज्य मगध के आसपास तक ही सीमित था

12.  चंद्रगुप्त प्रथम ( 391 ई. से 335 ईसवी तक ) - चंद्रगुप्त प्रथम एक प्रतापी शासक था उसने लिच्छवी वंश की कन्या देवी से विवाह किया उसने गुप्त वंश भी चलाया

13. समुद्रगुप्त - ( 335 ई . से 375 ई . तक ) -  हरिषेन द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति के समुद्रगुप्त की विजय उपलब्धियों तथा चारित्रिक विशेषताओं की जानकारी मिलती है इसमें समुद्रगुप्त के राज्यअभिषेक, दिग्विजय एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है समुद्रगुप्त को "कविराज" दानी , उच्च कोटि का विद्वान,  विद्या का सरंक्षण,  धर्म निष्ठ,  पराक्रमी,  विनयशील, विजयकांक्षी आदि बताया गया है

 14.समुद्रगुप्त की विजयें

1. समुद्रगुप्त ने आर्यवर्त  के राजाओं पराजित किया, 2. समुद्रगुप्त ने दक्षिण के 12  राजाओं को भी पराजित किया

3. उसने मध्य भारत के आठवीको को भी पराजित किया 4.  सीमांत राज्यों और गणराज्य द्वारा समुद्र गुप्त की अधीनता स्वीकार करना 5.  पड़ोस के विदेशी राज्यों द्वारा  अधीन मैत्री करना

 15. चंद्रगुप्त द्वितीय ( 375 ई.  से 414 ई. तक) -  चंद्रगुप्त द्वितीय समुद्रगुप्त का पुत्र था

 वह एक पराक्रमी योद्धा और योग्य शासक था

 उसने वैवाहिक संबंधों द्वारा अपनी स्थिति सुदृढ़ कि उसने शकों को पराजित किया और वाहिक तथा बंगाल तक अपनी सत्ता का विस्तार किया

 कुमारगुप्त प्रथम -  उसने बड़ी संख्या में मुद्राएं जारी करवाई

 इसे पुष्यमित्र जातियों के विद्रोह का सामना करना पड़ा 

इसने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की


17. स्कंदगुप्त ( 455 ई.  से 467 ई. तक) -  स्कंद गुप्त ने हूणों को पराजित कर अपने पराक्रम का परिचय दिया वह प्रजापालक उदार तथा धर्म सहिष्णु शासक था 

वह एक योग्य प्रशासक था 

उसके समय में सौराष्ट्र के राज्यपाल  परणदत्त के पुत्र चक्रपालित ने सुदर्शन झील के बांध का पुनर्निर्माण किया


18.  गुप्त कला -  गुप्त काल में वास्तुकला की अत्यधिक उन्नति हुई इस युग में अनेक मंदिर बनाएंगे जिनमें तिगवा का मंदिर,  भूमरा का शिव मंदिर,  देवगढ़ का दशावतार मंदिर आदि उल्लेखनीय है  इस युग में मूर्तिकला का भी अत्यधिक विकास हुआ इस युग में निर्मित सुल्तानगंज की बुध मूर्ति,   मथुरा की विष्णु मूर्ति,  उदयगिरि की वराह  की मूर्ति, उल्लेखनीय हैं गुप्त चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण अजंता की गुफाओं से प्राप्त हुए हैं अजंता के चित्र अद्वितीय है

19. साहित्य के क्षेत्र में उन्नति -  गुप्त काल में साहित्य का अत्यधिक विकास हुआ कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम्,  शुद्रक ने  मृच्नेछकटिकम्,  विशाखा दत्त ने मुद्राराक्षस नामक नाटक लिखकर गुप्त काल में स्मृतियों की रचना हुई जिनमें कानूनों का संकलन हुआ इस युग में नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था

20. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - गुप्त काल में विज्ञान एवं तकनीकी की विभिन्न शाखाओं का महत्व पूर्ण विकास हुआ इस काल में गणित, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद आदि का अत्यधिक विकास हुआ आर्यभट्ट एक प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं ज्योति शास्त्री था वराहमिहिर ने प्रमुख तथा पुलिस का सिद्धांत प्रतिपादित किया वाग्भट ने आयुर्वेदिक के प्रसिद्ध ग्रंथ  'अष्टांग हृदय'  की रचना की इस युग में धातु विज्ञान की उन्नति हुई


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